‘सिर्फ देशभक्ति से नहीं बिकेंगे सामान’, दिवाली पर चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम पर ग्लोबल टाइम्स ने भारत को दी नसीहत

नई दिल्ली: दिवाली के दौरान भारतीय बाजारों में चीन में बने सजावटी सामान और एलईडी लाइट्स की मौजूदगी को लेकर बहस तेज है। इसी बीच चीन के सरकारी रुख के करीब माना जाने वाला अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय कंपनियों को सलाह दी है कि वे केवल देशभक्ति के नाम पर ग्राहकों को आकर्षित नहीं कर सकतीं। ग्राहकों को अपनी ओर खींचने के लिए उचित कीमत, उत्पादों में विविधता और समय पर सामान की आपूर्ति जरूरी है।

ग्लोबल टाइम्स ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि भारतीय कंपनियों को चीनी उत्पादों से मुकाबला करने के लिए गुणवत्ता और कीमत के स्तर पर खुद को मजबूत करना होगा। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की चर्चा है।

दिवाली के लिए चीन को मिल रहे सजावटी सामान के ऑर्डर

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दिवाली के लिए चीन के निर्माताओं को भारत से सजावटी लाइटिंग और एलईडी स्ट्रिंग लाइट्स के बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं। चीन के झेजियांग प्रांत के यिवू शहर में स्थित निर्माता भारतीय बाजार की मांग के अनुसार अलग-अलग तरह के सजावटी उत्पाद तैयार कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय बाजार में चीनी उत्पादों की मांग बनी हुई है। कीमत और समय पर उपलब्धता के कारण सजावटी सामान के क्षेत्र में चीन की कंपनियां भारतीय बाजार में अपनी जगह बनाए हुए हैं।

भारत-चीन व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर के पार

भारत और चीन के बीच व्यापार असंतुलन भी लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 151 अरब डॉलर रहा। इस दौरान भारत का व्यापार घाटा बढ़कर लगभग 112 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह करीब 99 अरब डॉलर था।

आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में भारत ने चीन को लगभग 19.47 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि चीन से आयात 131 अरब डॉलर से अधिक रहा। इस तरह चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया।

पीयूष गोयल बोले- स्वदेशी सामान को प्राथमिकता दें, लेकिन जबरदस्ती नहीं

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले सप्ताह चीनी उत्पादों के मुद्दे पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि चीनी पटाखों से बचने का फैसला लोगों को अपनी इच्छा से करना चाहिए। उन्होंने भारतीय उपभोक्ताओं से ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि किसी पर जबरदस्ती नहीं की जा सकती।

गोयल के मुताबिक, जो व्यापारी कर चुकाकर सामान आयात करता है, उसे इसकी अनुमति मिलनी चाहिए। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का पालन करता है। उन्होंने जापान और दक्षिण कोरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि बदलाव राष्ट्रीय भावना और उपभोक्ताओं की अपनी पसंद से आना चाहिए।

चीनी एलईडी लाइट्स कीमत में भारतीय उत्पादों से सस्ती

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में कीमतों के अंतर को भी रेखांकित किया गया है। इसके मुताबिक, चीन में बनी 10 मीटर की एलईडी स्ट्रिंग लाइट्स करीब 100 रुपये या उससे कम कीमत पर उपलब्ध हैं। वहीं, इसी तरह की भारतीय लाइट्स की कीमत लगभग दोगुनी बताई गई है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस साल कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी के बावजूद चीनी लाइट्स सस्ती बनी हुई हैं। इसकी एक वजह उनमें तांबे की कम मात्रा होना बताई गई है।

हालांकि, दिवाली के दौरान भारत में चीन से आयात होने वाले सजावटी सामान का कोई आधिकारिक आंकड़ा सरकार या किसी एजेंसी की ओर से जारी नहीं किया जाता। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) जैसी संस्थाओं ने अपनी कुछ रिपोर्टों में स्वदेशी सामान की बढ़ती प्राथमिकता और चीनी उत्पादों की मांग में कमी का दावा किया है।

ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय कंपनियों को दी प्रतिस्पर्धा की सलाह

ग्लोबल टाइम्स ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि त्योहारी सामान भले ही दोनों देशों के कुल व्यापार का छोटा हिस्सा हो, लेकिन यह भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की क्षमता की परीक्षा है।

अखबार के मुताबिक, आयात को केवल अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह नहीं माना जाना चाहिए। इससे वितरकों की लागत कम होती है, ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलते हैं और घरेलू कंपनियों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती आती है। इससे भारतीय निर्माताओं को अपने उत्पादों में सुधार करने का अवसर भी मिलता है।

रिपोर्ट में भारतीय कंपनियों को संदेश दिया गया है कि वे केवल देशभक्ति के भरोसे ग्राहकों को नहीं जोड़ सकतीं। उन्हें बेहतर कीमत, उत्पादों की विविधता और समय पर आपूर्ति के दम पर बाजार में प्रतिस्पर्धा करनी होगी।

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